जस्ट डायल पर फर्जी ट्रांसपोर्ट आईडी बनाकर साइबर ठगी करने वाला गिरोह 4 आरोपी गिरफ्तार, स्वाट व मुरादनगर पुलिस की बड़ी कार्रवाई

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||TC24N|| फाईज़ अली सैफी

गाज़ियाबाद। पुलिस कमिश्नरेट गाज़ियाबाद की ग्रामीण जोन स्वाट टीम और थाना मुरादनगर पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए जस्ट डायल पर फर्जी ट्रांसपोर्ट सर्विस के नाम पर साइबर ठगी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया हैं। पुलिस ने चार अभियुक्तों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से घटना में प्रयुक्त एक कीपैड मोबाइल फोन और चार मोबाइल खरीद बिल बरामद किए हैं। जांच में उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल सहित चार राज्यों में हुई साइबर धोखाधड़ी की घटनाओं का खुलासा हुआ हैं। पुलिस महानिदेशक उत्तर प्रदेश द्वारा साइबर अपराध की रोकथाम के लिए चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत पुलिस आयुक्त गाज़ियाबाद के निर्देशन में साइबर पोर्टल से चिन्हित हॉटस्पॉट पर कार्रवाई की जा रही थी। इसी दौरान प्राप्त सूचना के आधार पर 21 जुलाई 2026 को थाना मुरादनगर क्षेत्र से चारों आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।

डीसीपी ग्रामीण ने किया खुलासा

डीसीपी ग्रामीण सुरेंद्रनाथ तिवारी ने प्रेसवार्ता में बताया कि पूछताछ के दौरान आरोपियों ने स्वीकार किया कि उन्होंने ऑनलाइन ठगी के लिए संगठित गिरोह बना रखा था। गिरोह का मुख्य आरोपी सौरभ सिंह ने “गुजरात महाराष्ट्र रोड लाइन” के नाम से जस्ट डायल पर फर्जी ट्रांसपोर्ट आईडी बनाई थी। इस आईडी के माध्यम से उन्हें उन ग्राहकों की जानकारी मिल जाती थी जो अपना सामान एक स्थान से दूसरे स्थान तक भेजने के लिए वाहन तलाश रहे होते थे। इसके बाद आरोपी फर्जी मोबाइल नंबरों से ग्राहकों को कॉल कर वाहन उपलब्ध कराने का झांसा देते और बुकिंग के नाम पर पहले किराए का 10 से 50 प्रतिशत तक एडवांस ऑनलाइन जमा करा लेते थे। एडवांस राशि ऐसे बैंक खातों में मंगाई जाती थी जो फर्जी दस्तावेजों और धोखे से प्राप्त पहचान पत्रों के आधार पर खोले गए थे।

फर्जी सिम और बैंक खाते तैयार करता था साथी

पुलिस जांच में सामने आया कि गिरोह का एक सदस्य दशमेश फर्जी सिम कार्ड और बैंक खाते उपलब्ध कराने का काम करता था। वह गांव-गांव जाकर लोगों की जानकारी के बिना उनके दस्तावेजों पर कई सिम कार्ड सक्रिय करा लेता था। उसके पास एनएसडीएल पेमेंट बैंक की आईडी भी थी, जिसके जरिए वह फर्जी मोबाइल नंबरों के साथ ऑनलाइन बैंक खाते खोलता और एटीएम कार्ड प्राप्त कर गिरोह को उपलब्ध कराता था। प्रत्येक बैंक खाता और सिम कार्ड के बदले मुख्य आरोपी सौरभ, दशमेश और उसके साथियों को करीब 4 हजार रुपये देता था। इन्हीं खातों में ठगी की रकम मंगाकर तत्काल एटीएम से निकाल ली जाती थी। शिकायत दर्ज होने पर आरोपी संबंधित सिम कार्ड, मोबाइल फोन और एटीएम कार्ड नष्ट कर देते थे ताकि पुलिस तक कोई सुराग न पहुंच सके।

लोकेशन छिपाने के लिए अपनाते थे अलग तरीका

आरोपियों ने पूछताछ में बताया कि वे कभी किसी सुनसान स्थान तो कभी सड़क पर चलते हुए ग्राहकों को कॉल करते थे, जिससे उनकी वास्तविक लोकेशन ट्रेस न हो सके। कॉल करने के लिए महंगे स्मार्टफोन की बजाय सस्ते कीपैड मोबाइल का इस्तेमाल किया जाता था। किसी नंबर की शिकायत मिलते ही मोबाइल और सिम कार्ड तोड़कर फेंक दिए जाते थे और नए नंबर से लोगों को कॉल कर ठगी शुरू कर दी जाती थी। बरामद मोबाइल बिलों के संबंध में पूछताछ करने पर सौरभ ने बताया कि ये उन कीपैड मोबाइल फोन के बिल हैं जिनका इस्तेमाल विभिन्न लोगों से धोखाधड़ी करने में किया गया था।

चार राज्यों में फैला था ठगी का नेटवर्क

पुलिस के अनुसार आरोपियों के कब्जे से मिले दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल में हुई चार साइबर धोखाधड़ी की घटनाओं का खुलासा हुआ हैं। पुलिस अब गिरोह से जुड़े अन्य सदस्यों, फर्जी बैंक खातों, सिम कार्ड उपलब्ध कराने वाले नेटवर्क और ठगी की कुल रकम की जांच कर रही हैं।

गिरफ्तार अभियुक्त

वहीं, गिरफ्तार गिरोह के सदस्यों की पहचान सौरभ सिंह पुत्र रणधीर सिंह, निवासी कृष्णा अंजली एन्क्लेव, मोरटा, गाज़ियाबाद (मूल निवासी फर्रुखाबाद), राकेश सिंह पुत्र हरिलाल सिंह, निवासी सांपला, हरियाणा (मूल निवासी लखीमपुर खीरी) और अन्य दो गिरफ्तार अभियुक्तों के संबंध में पुलिस द्वारा विधिक कार्रवाई जारी हैं।

पुलिस ने बताया कि गिरोह के अन्य सहयोगियों की तलाश की जा रही हैं और पूरे नेटवर्क का खुलासा करने के लिए जांच को आगे बढ़ाया जा रहा हैं। साइबर अपराध से जुड़े इस मामले में कई महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्य भी जुटाए जा रहे हैं, जिनके आधार पर आगे और गिरफ्तारियां होने की संभावना हैं।

The Crime 24 News
Author: The Crime 24 News

Faiez Ali Saifi – Editor-in-Chief / Senior Journalist | Place: Ghaziabad, NCR, Uttar Pradesh, India

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