बुलंदशहर में भैंस विवाद पर पुलिस कार्रवाई सवालों के घेरे में: 12 दिन बाद दर्ज हुआ मुकदमा, पीड़ित का आरोप—आरोपी के घर से अब तक बरामद नहीं हुईं भैंसें

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दूध के पैसे को लेकर शुरू हुआ विवाद, महिला से मारपीट कर भैंस ले जाने का आरोप; पीड़ित परिवार का दावा—पुलिस से लेकर डीआईजी मेरठ तक लगाई न्याय की गुहार

||TC24N|| फाईज़ अली सैफी

बुलंदशहर। जनपद बुलंदशहर के कोतवाली देहात थाना क्षेत्र में दूध के भुगतान और भैंसों को लेकर सामने आया विवाद अब पुलिस कार्रवाई को लेकर सवाल खड़े कर रहा हैं। ग्राम चावली, चौकी ठंडी प्याऊ क्षेत्र निवासी जुबैर पुत्र फैमू ने पुलिस को दी शिकायत में आरोप लगाया हैं कि गांव के ही नौशाद पुत्र शमसू पिछले करीब तीन महीने से उसकी पत्नी से भैंस का दूध ले रहा था, लेकिन दूध की तय रकम का भुगतान नहीं किया। विवाद बढ़ने पर आरोपी ने कथित तौर पर जुबैर की पत्नी आसमीना के साथ मारपीट की और भैंसों को जबरन अपने घर ले गया। पीड़ित परिवार का कहना हैं कि घटना के बाद उन्होंने स्थानीय पुलिस से लेकर उच्च अधिकारियों तक लगातार न्याय की गुहार लगाई। उनका आरोप हैं कि मुकदमा दर्ज होने में भी करीब 12 दिन लग गए और मुकदमा दर्ज होने के बाद भी आरोपी के घर से भैंसों की बरामदगी नहीं की गई हैं। पीड़ित का दावा हैं कि वह कई बार संबंधित थाना और चौकी के चक्कर काट चुका हैं, लेकिन उसे अभी तक अपनी भैंसें वापस नहीं मिल सकी हैं।

तीन महीने से दूध लेने का आरोप, भुगतान को लेकर हुआ विवाद

पुलिस को दी गई शिकायत के मुताबिक जुबैर मजदूरी करता हैं, जबकि उसकी पत्नी आसमीना भैंस पालकर दूध बेचती हैं। इसी से परिवार का गुजर-बसर चलता हैं। शिकायत में कहा गया हैं कि नौशाद पिछले करीब तीन महीने से उनके यहां से दूध ले रहा था। दूध की कीमत 60 रुपये प्रति किलोग्राम तय होने की बात कही गई हैं और आरोप हैं कि नौशाद ने हर महीने दूध का पूरा भुगतान करने का आश्वासन दिया था। पीड़ित के मुताबिक तीन महीने बीत जाने के बावजूद दूध का भुगतान नहीं किया गया। बाद में कथित तौर पर नौशाद ने 60 रुपये के बजाय 50 रुपये प्रति किलोग्राम के हिसाब से भुगतान करने की बात कही। इसको लेकर विवाद बढ़ गया और जुबैर की ओर से कई बार दूध देने से इनकार किया गया। पीड़ित का आरोप हैं कि इसके बावजूद नौशाद जबरन दूध लेकर जाता रहा।

15 अगस्त की शाम महिला घर पर थी अकेली

शिकायत के अनुसार घटना 15 अगस्त 2026 की शाम करीब 7 से 8 बजे की बताई गई हैं। उस समय जुबैर मजदूरी करने गया हुआ था और उसकी पत्नी आसमीना घर पर अकेली थी।
आरोप हैं कि नौशाद दूध लेने के लिए घर पहुंचा। आसमीना ने दूध देने से इनकार कर दिया। इसके बाद नौशाद कथित तौर पर भैंस खोलकर ले जाने लगा। महिला ने जब उसे रोकने का प्रयास किया तो दोनों के बीच विवाद हो गया। शिकायत में आरोप लगाया गया हैं कि नौशाद ने महिला के साथ गाली-गलौज की और उसके साथ मारपीट की। इसके बाद वह भैंसों को कथित तौर पर जबरन अपने घर ले गया। पीड़ित परिवार का कहना हैं कि भैंसें उनके परिवार की आजीविका का मुख्य साधन हैं। ऐसे में भैंसों के वापस नहीं मिलने से परिवार के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया हैं।

मुकदमा दर्ज होने के बाद भी भैंसों की बरामदगी नहीं होने का आरोप

पीड़ित जुबैर का कहना हैं कि घटना के बाद उसने स्थानीय पुलिस से कार्रवाई की मांग की। उसका दावा हैं कि वह कोतवाली देहात थाना और संबंधित चौकी के कई चक्कर काट चुका हैं। पीड़ित के अनुसार मामले को लेकर उसने उच्च पुलिस अधिकारियों तक भी अपनी शिकायत पहुंचाई। पीड़ित पक्ष का दावा हैं कि करीब 12 दिन बाद मामले में मुकदमा दर्ज किया गया, लेकिन मुकदमा दर्ज होने के बावजूद अभी तक आरोपी के घर से भैंसों को बरामद नहीं किया गया हैं। जुबैर का आरोप हैं कि मुकदमा दर्ज होने के बाद पुलिस ने आरोपी नौशाद के घर पर प्रभावी दबिश नहीं दी और न ही वहां मौजूद बताई जा रही भैंसों को बरामद किया गया।

“पुलिस उल्टा समझौते का दबाव बना रही”—पीड़ित का आरोप

पीड़ित जुबैर का यह भी आरोप हैं कि उसे न्याय दिलाने के बजाय स्थानीय स्तर पर उस पर समझौते का दबाव बनाया जा रहा हैं। उसका कहना हैं कि उसने संबंधित चौकी प्रभारी, थाना प्रभारी निरीक्षक और अन्य अधिकारियों से मामले की जानकारी लेने का प्रयास किया, लेकिन उसे लगातार आश्वासन ही मिल रहा हैं। पीड़ित के मुताबिक वह इस मामले को लेकर निचले स्तर से लेकर डीआईजी मेरठ तक अपनी शिकायत पहुंचा चुका हैं। इसके बावजूद उसकी भैंसों की बरामदगी नहीं होने से वह खुद को असहाय महसूस कर रहा हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई हैं। पुलिस का आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद ही तस्वीर पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।

परिवार की रोजी-रोटी पर संकट

पीड़ित परिवार का कहना हैं कि वह आर्थिक रूप से कमजोर हैं और मजदूरी तथा दूध बेचकर परिवार का पालन-पोषण करता हैं। भैंसें उसके परिवार के लिए महज पशु नहीं बल्कि आय का प्रमुख साधन हैं। जुबैर का कहना है कि यदि भैंसें वापस नहीं मिलती हैं तो उसके परिवार की रोजी-रोटी प्रभावित होगी। उसने पुलिस और उच्च अधिकारियों से आरोपी के कब्जे से भैंसों को तत्काल बरामद कराकर उसे सौंपने की मांग की हैं।

पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवाल

मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि पीड़ित के आरोपों के आधार पर मुकदमा दर्ज किया जा चुका हैं और भैंसों के आरोपी के घर पर मौजूद होने की जानकारी पुलिस को दी गई हैं, तो अब तक उनकी बरामदगी क्यों नहीं हुई? पीड़ित का आरोप हैं कि वह लगातार पुलिस अधिकारियों से संपर्क कर रहा हैं, लेकिन कार्रवाई के नाम पर उसे केवल आश्वासन मिल रहा हैं। ऐसे में स्थानीय पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक हैं। सवाल यह भी हैं कि क्या आरोपी इतना प्रभावशाली हैं कि मुकदमा दर्ज होने के बावजूद पुलिस उसके घर से कथित तौर पर मौजूद भैंसों को बरामद नहीं कर पा रही हैं? या फिर जांच की अपनी किसी प्रक्रिया के चलते पुलिस ने अभी तक बरामदगी नहीं की हैं? इसका जवाब पुलिस की आधिकारिक कार्रवाई और जांच के बाद ही सामने आएगा।

उच्च अधिकारियों से निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग

पीड़ित परिवार ने बुलंदशहर पुलिस के उच्च अधिकारियों से पूरे मामले में निष्पक्ष जांच कराने, आरोपी के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई करने और कथित तौर पर आरोपी के कब्जे में मौजूद भैंसों को बरामद कर पीड़ित परिवार को सौंपने की मांग की हैं। पीड़ित का कहना हैं कि वह लगातार अधिकारियों के दरवाजे पर न्याय की गुहार लगा रहा हैं। अब उसकी उम्मीद उच्च अधिकारियों से हैं कि मामले में स्थानीय स्तर पर हुई कार्रवाई की समीक्षा की जाएगी और यदि किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती हैं तो संबंधित पुलिसकर्मियों की जिम्मेदारी तय की जाएगी।

बड़ा सवाल

मुकदमा दर्ज होने के बावजूद यदि पीड़ित की भैंसें बरामद नहीं होतीं और उसे लगातार पुलिस के चक्कर लगाने पड़ते हैं, तो आखिर उसे न्याय कब मिलेगा?

पीड़ित परिवार को अब उम्मीद हैं कि बुलंदशहर पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी मामले का संज्ञान लेकर निष्पक्ष जांच कराएंगे और कानून के अनुसार आवश्यक कार्रवाई करेंगे। साथ ही यह भी स्पष्ट होगा कि आरोपी के खिलाफ पुलिस ने अब तक क्या कार्रवाई की हैं और भैंसों की बरामदगी में देरी की वास्तविक वजह क्या हैं।

The Crime 24 News
Author: The Crime 24 News

Faiez Ali Saifi – Editor-in-Chief / Senior Journalist | Place: Ghaziabad, NCR, Uttar Pradesh, India

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