||TC24N|| फाईज़ अली सैफी
पुलिस कमिश्नरेट प्रणाली लागू होने के बाद गाज़ियाबाद में एक बार फिर प्रशासनिक शैली में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा हैं। जिले के नए पुलिस आयुक्त जे. रविंद्र गोड के कार्यभार संभालते ही पुलिस महकमे की कार्यसंस्कृति में उल्लेखनीय परिवर्तन शुरू हो गए हैं। कमिश्नर द्वारा जारी किए गए नए दिशा-निर्देशों का उद्देश्य जनता और पुलिस के बीच की दूरी को कम करना और पुलिस व्यवस्था को अधिक संवेदनशील व जवाबदेह बनाना हैं।
फरियादियों के लिए थाने में सम्मानजनक माहौल
पुलिस आयुक्त जे. रविंद्र गोड ने अधिकारियों को निर्देशित किया हैं कि थाने आने वाले प्रत्येक फरियादी से सम्मानजनक व्यवहार किया जाए। उन्हें, बैठाकर ध्यानपूर्वक शिकायत सुनी जाए और संभव हो तो बच्चों को टॉफी या चॉकलेट देकर माहौल को सहज बनाया जाए। साथ ही, पानी जैसी मूलभूत सुविधा को भी प्राथमिकता दी गई हैं। एफआईआर दर्ज होने के बाद उसकी कॉपी फरियादी को उनके घर तक जाकर सौंपने की प्रक्रिया भी अनिवार्य कर दी गई हैं।
कार्यालयीन अनुशासन में भी सख्ती
कमिश्नर के आदेशानुसार अब सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक सभी पुलिस अधिकारी अपने निर्धारित कार्यालय में उपस्थित रहकर शिकायतों की सुनवाई करेंगे। साथ ही मामलों की गुणवत्ता की जांच कर समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
जनता से संवाद की पहल
पुलिस और समाज के बीच भरोसे की दीवार मजबूत करने के लिए कमिश्नर ने सामाजिक, धार्मिक और क्षेत्रीय प्रतिनिधियों के साथ नियमित संवाद की योजना भी बनाई हैं। यह पहल न केवल अपराध नियंत्रण में मददगार हो सकती हैं, बल्कि यह सामाजिक सहयोग को भी प्रोत्साहित करेगी।
पुलिसकर्मियों पर बढ़ता दबाव
जहां एक ओर यह बदलाव आम नागरिकों के लिए राहत लेकर आया हैं, वहीं दूसरी ओर थानों में तैनात पुलिसकर्मियों पर काम का बोझ स्पष्ट रूप से बढ़ा हैं। कहीं ना कहीं, अचानक लागू हुए नए निर्देशों ने कर्मचारियों को मानसिक और शारीरिक रूप से चुनौती में डाल दिया हैं। कुछ अधिकारियों का मानना है कि बदलाव स्वागतयोग्य हैं, लेकिन इसके क्रियान्वयन के लिए जरूरी प्रशिक्षण, समय और संसाधन भी उतने ही जरूरी हैं।
मानव संसाधन का संतुलन भी जरूरी
विशेषज्ञों का मानना हैं कि यदि पुलिस महकमे में मानवीय व्यवहार को प्राथमिकता दी जा रही हैं, तो यह ज़रूरी हैं कि स्वयं पुलिस कर्मचारियों के स्वास्थ्य, मानसिक स्थिति और पारिवारिक जीवन का भी ध्यान रखा जाए। लिहाजा, बदलाव को केवल आदेश से नहीं, बल्कि समग्र रणनीति से लागू किया जाना चाहिए, ताकि पुलिस बल मानसिक रूप से तैयार रहे और अपनी ड्यूटी को बेहतर ढंग से निभा सके।
निष्कर्ष
गाज़ियाबाद पुलिस में शुरू हुआ यह बदलाव निश्चित रूप से एक सकारात्मक कदम हैं। जनता को इज्जत और त्वरित न्याय मिलना एक लोकतांत्रिक व्यवस्था की बुनियाद हैं। लेकिन, इस व्यवस्था को स्थायी और प्रभावी बनाने के लिए यह जरूरी हैं कि पुलिसकर्मियों को भी बदलाव के साथ सहजता से जुड़ने का अवसर मिले। दरअसल, आने वाले दिन तय करेंगे कि यह सुधारात्मक प्रक्रिया कितना असर छोड़ती हैं।
Author: The Crime 24 News
Faiez Ali Saifi – Editor-in-Chief / Senior Journalist | Place: Ghaziabad, NCR, Uttar Pradesh, India









