गाज़ियाबाद में फर्जी बीमा पॉलिसी और Google Ads के जरिए 40 लाख की साइबर ठगी का खुलासा, क्राइम ब्रांच ने 7 आरोपियों को दबोचा

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टाटा एआईजी इंश्योरेंस के नाम पर बनाए जाते थे फर्जी विज्ञापन और बीमा प्रमाणपत्र, पॉलिसी नवीनीकरण पर छूट का झांसा देकर खातों में मंगाते थे रकम; गिरोह का सरगना दीपक खन्ना उर्फ डीजे फरार

||TC24N|| फाईज़ अली सैफी

गाज़ियाबाद। पुलिस कमिश्नरेट गाज़ियाबाद की क्राइम ब्रांच और साइबर क्राइम थाना पुलिस ने फर्जी बीमा पॉलिसी तथा Google Ads के माध्यम से लोगों को ठगी का शिकार बनाने वाले गिरोह का पर्दाफाश करते हुए सात आरोपियों को गिरफ्तार किया हैं। पुलिस की जांच में सामने आया हैं कि गिरोह के सदस्य टाटा एआईजी इंश्योरेंस के नाम का इस्तेमाल कर फर्जी विज्ञापन तैयार करते थे और बीमा पॉलिसी के नवीनीकरण पर प्रीमियम में छूट देने का लालच देकर लोगों से रकम अपने खातों में ट्रांसफर कराते थे। इसके बाद फोटो एडिटिंग सॉफ्टवेयर की मदद से फर्जी बीमा प्रमाणपत्र तैयार कर पीड़ितों को ई-मेल के माध्यम से भेज दिए जाते थे। पुलिस के मुताबिक, गिरोह पिछले करीब चार महीने से सक्रिय था। राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर केरल, झारखंड समेत अन्य राज्यों से संबंधित शिकायतें सामने आई हैं। इन शिकायतों में अनुमानित ठगी की रकम 40 लाख रुपये से अधिक बताई गई हैं। पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों के कब्जे से चार मोबाइल फोन, दो एटीएम/डेबिट कार्ड, दो चेकबुक, एक बैंक पासबुक और 3,000 रुपये नकद बरामद किए हैं। गिरोह के सरगना दीपक खन्ना उर्फ डीजे की तलाश जारी हैं।

फर्जी Google Ads से शुरू होता था ठगी का खेल

डीसीपी मुख्यालय बलवंत कुमार चौधरी ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ में साइबर ठगी के तरीके और गिरोह के आपसी नेटवर्क के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आई हैं। जांच में पता चला कि गिरोह के सदस्य बीमा पॉलिसी अपडेट कराने और उसका नवीनीकरण करने वाले लोगों को निशाना बनाते थे। आरोपियों में शामिल नीरज सोलंकी कथित तौर पर फर्जी ई-मेल आईडी बनाता था और टाटा एआईजी इंश्योरेंस के नाम से फर्जी Google Ads तैयार करता था। इसके अलावा फेसबुक पेज भी बनाए गए थे। इन विज्ञापनों में गिरोह के सदस्यों के मोबाइल नंबर दिए जाते थे, ताकि बीमा पॉलिसी के संबंध में जानकारी तलाशने वाले लोग उनसे संपर्क कर सकें। जब कोई व्यक्ति विज्ञापन में दिए गए नंबर पर फोन करता था, तो उसे पॉलिसी नवीनीकरण के प्रीमियम पर छूट देने का ऑफर दिया जाता था। ग्राहक को भरोसे में लेकर रकम गिरोह से जुड़े बैंक खातों में ट्रांसफर करा ली जाती थी। इसके बाद फोटो एडिटिंग सॉफ्टवेयर की सहायता से बीमा कंपनी के नाम पर फर्जी प्रमाणपत्र तैयार कर ई-मेल से भेज दिए जाते थे, जिससे पीड़ित को शुरुआत में ठगी का पता नहीं चलता था। पुलिस को आरोपियों के मोबाइल फोन से कथित फर्जी बीमा प्रमाणपत्र, ई-मेल और विज्ञापनों से संबंधित डिजिटल साक्ष्य भी मिले हैं। इन साक्ष्यों के आधार पर पुलिस गिरोह के काम करने के तरीके और अन्य संभावित पीड़ितों के संबंध में जांच कर रही हैं।

कॉल सेंटर में काम करने के अनुभव का किया इस्तेमाल

पुलिस की पूछताछ में सामने आया कि नीरज भाटी, नीरज सोलंकी और विक्रांत सिंह दिल्ली स्थित बीएमए नामक कॉल सेंटर में काम कर चुके थे। पुलिस के अनुसार, इसी दौरान उन्हें बीमा पॉलिसी के नाम पर धोखाधड़ी करने के तौर-तरीकों की जानकारी मिली थी। कॉल सेंटर पर पुलिस की दबिश के बाद तीनों वहां से फरार हो गए थे। बाद में राहुल कुमार के माध्यम से इन तीनों का संपर्क गिरोह के कथित सरगना दीपक खन्ना उर्फ डीजे से हुआ। इसके बाद आरोपियों ने कथित तौर पर फर्जी बीमा पॉलिसी और ऑनलाइन विज्ञापनों के जरिए ठगी का नेटवर्क संचालित करना शुरू किया। पुलिस के मुताबिक, गिरोह के सदस्य अपने पुराने कॉल सेंटर अनुभव का इस्तेमाल कर फोन पर लोगों से बातचीत करते थे। बीमा पॉलिसी के नवीनीकरण, प्रीमियम में छूट और प्रमाणपत्र उपलब्ध कराने जैसे दावों के जरिए लोगों का विश्वास जीतने की कोशिश की जाती थी।

बैंक खातों के बदले मिलता था पांच प्रतिशत कमीशन

जांच में बैंक खातों के इस्तेमाल और ठगी की रकम के बंटवारे का तरीका भी सामने आया है। पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार विक्रम सिंह उर्फ विक्की कथित तौर पर अन्य लोगों के बैंक खाते खुलवाकर उनकी जानकारी दीपक खन्ना उर्फ डीजे तक पहुंचाता था। इसके बदले विक्रम को संबंधित खातों में आने वाली साइबर ठगी की रकम का पांच प्रतिशत कमीशन मिलता था। खाताधारकों को भी पांच प्रतिशत कमीशन देने की बात पूछताछ में सामने आई हैं। साइबर ठगी से प्राप्त रकम को खाताधारक बैंक से निकालते थे और अपना हिस्सा रखने के बाद शेष रकम विक्रम को देते थे। विक्रम अपना कमीशन काटकर बाकी रकम दीपक तक पहुंचाता था। इसके बाद गिरोह का सरगना कथित तौर पर रकम को सदस्यों के बीच बांटता था। पुलिस के मुताबिक, विक्रम ने अपने खातों के अलावा सुशील कुमार और नितिन के कुल छह बैंक खाते भी कथित तौर पर दीपक को उपलब्ध कराए थे। दीपक गिरोह के लिए मोबाइल नंबर, मोबाइल फोन और अन्य जानकारियां उपलब्ध कराने के साथ बैंक खातों की व्यवस्था में भी भूमिका निभाता था। पुलिस अब इन खातों में हुए लेनदेन, रकम निकालने वाले व्यक्तियों और साइबर ठगी से प्राप्त धनराशि के अंतिम इस्तेमाल की जांच कर रही हैं।

डासना जेल में हुई थी गिरोह के सरगना और राहुल की मुलाकात

पुलिस की पूछताछ के अनुसार, इस गिरोह का कथित सरगना दीपक खन्ना उर्फ डीजे मूल रूप से गाज़ियाबाद के विजयनगर का रहने वाला हैं और वर्तमान में उत्तराखंड में रह रहा है। पुलिस ने बताया कि दीपक और राहुल कुमार की मुलाकात डासना जेल, गाज़ियाबाद में हुई थी। जेल से बाहर आने के बाद दोनों ने कथित तौर पर साइबर फ्रॉड की घटनाओं को अंजाम देना शुरू किया। राहुल और नीरज भाटी पहले से एक-दूसरे को जानते थे। नीरज भाटी का राहुल के परिवार की बिल्डिंग मैटेरियल की दुकान पर आना-जाना था। राहुल के माध्यम से नीरज भाटी, नीरज सोलंकी और विक्रांत सिंह का संपर्क दीपक से हुआ। इसके बाद अलग-अलग सदस्यों को फोन पर लोगों से बात करने, फर्जी विज्ञापन तैयार करने और बैंक खातों की व्यवस्था करने जैसी जिम्मेदारियां दी गईं। पुलिस के अनुसार, गिरोह में प्रत्येक सदस्य की भूमिका अलग-अलग थी। कोई लोगों से फोन पर संपर्क करता था, कोई फर्जी विज्ञापन तैयार करता था, तो कोई ठगी की रकम प्राप्त करने के लिए बैंक खातों की व्यवस्था करता था।

सात आरोपी गिरफ्तार, सरगना की तलाश जारी

क्राइम ब्रांच और साइबर क्राइम थाना पुलिस ने इस मामले में निम्नलिखित सात आरोपियों को गिरफ्तार किया हैं: जिनकी पहचान नीरज भाटी, निवासी ग्राम महेपा, थाना सिकंदराबाद, नीरज सोलंकी, निवासी ग्राम घराऊ, थाना खुर्जा देहात बुलन्दशहर, विक्रम सिंह उर्फ विक्की, निवासी ग्राम खेमपुर, जनपद अलीगढ़, नितिन, निवासी देवलोक कॉलोनी, जनपद हापुड़, सुशील कुमार, निवासी हंस कॉलोनी, रावली रोड, मुरादनगर, गाज़ियाबाद, विक्रांत सिंह, मूल निवासी जनपद आजमगढ़, वर्तमान पता सेक्टर-49, गौतमबुद्ध नगर और सातवें की राहुल कुमार, निवासी ग्राम फूलपुर, थाना जारचा, जनपद गौतमबुद्ध नगर के में हुई हैं। वहीं, इस मामले में गिरोह का सरगना दीपक कुमार खन्ना उर्फ डीजे, निवासी विजयनगर, गाज़ियाबाद अभी फरार हैं। पुलिस का कहना हैं कि वांछित आरोपी की गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं। साथ ही गिरोह से जुड़े अन्य व्यक्तियों, बैंक खातों और संदिग्ध लेनदेन की भी जांच की जा रही हैं।

ये सामान हुआ बरामद

पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों के कब्जे से निम्नलिखित सामान बरामद किया हैं: जिसमें, 4 मोबाइल फोन, 2 एटीएम/डेबिट कार्ड, एचडीएफसी बैंक की 2 चेकबुक, एक बैंक पासबुक और 3,000 रुपये नकद भी शामिल हैं। पुलिस इन मोबाइल फोन और अन्य दस्तावेजों की जांच के माध्यम से गिरोह के डिजिटल नेटवर्क, फर्जी विज्ञापनों और बैंक खातों से जुड़े अतिरिक्त साक्ष्य जुटा रही हैं।

कई राज्यों से मिलीं साइबर ठगी की शिकायतें

पुलिस के अनुसार, राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर आरोपियों के विरुद्ध केरल, झारखंड समेत अन्य राज्यों से साइबर अपराध संबंधी शिकायतें दर्ज मिली हैं। इन शिकायतों में ठगी की अनुमानित कुल रकम 40 लाख रुपये से अधिक बताई गई हैं। नीरज भाटी के मोबाइल नंबर से संबंधित केरल की एक शिकायत भी जांच में सामने आई हैं। इस मामले में थाना साइबर क्राइम, गाज़ियाबाद में मुकदमा संख्या 193/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता की धारा 3(5), 318(4) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66डी में मुकदमा दर्ज होने की जानकारी प्रेस नोट में दी गई हैं। पुलिस ने कुछ गिरफ्तार आरोपियों और वांछित आरोपी के विरुद्ध पूर्व के अन्य मुकदमों का भी उल्लेख किया हैं। इन आपराधिक मामलों का विवरण संबंधित पुलिस रिकॉर्ड के आधार पर जांच का हिस्सा हैं।

पुलिस की अपील: बीमा पॉलिसी के लिए आधिकारिक माध्यमों का ही करें इस्तेमाल

इस कार्रवाई के बाद ऑनलाइन बीमा सेवाओं के नाम पर होने वाली धोखाधड़ी को लेकर एक बार फिर सतर्क रहने की जरूरत सामने आई हैं। साइबर अपराधी गूगल विज्ञापनों, सोशल मीडिया पेजों, फोन कॉल और फर्जी ई-मेल के जरिए बीमा कंपनियों के प्रतिनिधि बनकर लोगों को निशाना बना सकते हैं। बीमा पॉलिसी का नवीनीकरण कराने से पहले संबंधित कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट या सत्यापित ग्राहक सेवा नंबर से जानकारी की पुष्टि करें। केवल विज्ञापन देखकर किसी अनजान व्यक्ति या खाते में रकम ट्रांसफर न करें। असामान्य रूप से अधिक छूट देने के प्रस्ताव पर विशेष सावधानी बरतें और बीमा प्रमाणपत्र की सत्यता सीधे संबंधित कंपनी से जांचें। यदि कोई व्यक्ति साइबर ठगी का शिकार होता हैं, तो उसे तत्काल साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क करना चाहिए और राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज करानी चाहिए। गाज़ियाबाद पुलिस के मुताबिक, मामले में आगे की जांच जारी हैं। पुलिस का ध्यान फरार सरगना की गिरफ्तारी, ठगी की पूरी रकम का पता लगाने और गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका सामने लाने पर हैं।

The Crime 24 News
Author: The Crime 24 News

Faiez Ali Saifi – Editor-in-Chief / Senior Journalist | Place: Ghaziabad, NCR, Uttar Pradesh, India

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